ॐ छाया देवि नमस्तुभ्यं शनि-जननि धर्मदा।
सर्वरोग विनाशाय भक्तानां सुखदा भव॥
दीर्घायुष्यम् आरोग्यं पुत्रपौत्र समृद्धिदम्।
देहि मे वरदा मातः छाया देवि नमोऽस्तुते॥
सौम्य रूपा सदा शान्ता सूर्यपत्नि नमोऽस्तुते।
शनि माता नमस्तेऽस्तु कृपा कुरु मयि सदा॥
कृष्णवर्णा च सौम्या त्वं भक्तानां शरणागतिः।
शनि पीड़ा हरे मातः त्वत्पूजना प्रशस्यते॥
• अंत में “ॐ छायायै नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
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